Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 100, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 100, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अकर्तृकर्मकरणे नास्ति कारणता शिवे ।
तस्मात्तत्कारणं नास्ति जगच्छब्दार्थवेदनम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि कर्ता, कर्म और कारणशून्य परमशिव में
कारणता नहीं है, इसलिए जगत् शब्दार्थज्ञान का वह कारण नहीं है