Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 101, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 101, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
तत्किमर्थमनर्थेऽस्मिन्निमग्नस्त्वं तपोमये ।
आश्रमादिविकल्पांशसाध्यस्याद्य कुकर्मणः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर आप क्यों इस कृच्छचान्द्रायण
आदि तपःक्लेशप्रचुर अनर्थ में अभी तक निमग्न हैं, जो कि वानप्रस्थ आश्रमआदि के अभिमान आदि
हजारों विकल्पविक्षेपांशों से साध्य कुत्सित कर्म का ही एक सम्बन्धी है