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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 103, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 103, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 103 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

शिखिध्वजस्य देहोऽसौ निश्चित्तस्तेजसोर्जितः । सत्त्वांशेन च संयुक्तस्तेन न ग्लानिभाजनम् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

शिखिध्वज की देह में तो जीवनहेतुओं का चूडाला ने अवलोकन किया, यह कहते है। शिखिध्वज की वह देह चित्तशून्य तो थी, परन्तु वह गरमी से युक्त और निर्वासनिक मन से युक्त थी, इससे वह ग्लानि की पात्र नहीं थी