Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 104, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 104, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
इदं गेहमिदं नेति विकल्पकलना मनः ।
न जहार तयो राम वात्येव विबुधाचलम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
विना घर की स्थिति का लक्षण बतलाते हैं।
हे श्रीरामजी, यह घर हे, यह घर नहीं है, इस तरह की विकल्प-कल्पना उन दोनों के मन को उस
प्रकार न हर सकी, जिस प्रकार झंझावात सुमेरु पर्वत को