Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 101
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 101 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 101
संस्कृत श्लोक
निरंशं निरहंकारं चिदात्मानमुपास्महे ।
सर्वस्यान्तःस्थितं सर्वमप्यपारैकरूपिणम् ।। १०१
हिन्दी अर्थ
जो सब भूतो के भीतर अवस्थित है, सर्वात्मक होते हुए भी जो दुरधिगम्य एवं एकरूप है तथा जो
असंख्य प्रतिबिम्बभूत चैतन्यो का (जीवोका) आरम्भक है, ऐसे चिदात्म-स्वरूप को मैं प्राप्त हो गया
हूँ