Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 100

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 100 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 100

संस्कृत श्लोक

विगताशेषसंरम्भं चिदात्मानमुपास्महे । निष्कौतुकं निरारम्भं निरीहं सर्वमेव च ।। १००

हिन्दी अर्थ

विषय-भोग की उत्कण्ठा से शून्य, प्रयत्न से रहित, चेष्टा से वर्जित, एकमात्र परिपूर्ण तथा अंश और अहंकार से रहित चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हैं