Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 99
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 99 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 99
संस्कृत श्लोक
समं सदैव सर्वत्र चिदात्मानमुपास्महे ।
प्रशान्तसर्वसंकल्पं विगताखिलकौतुकम् ।। ९९
हिन्दी अर्थ
जिसके सभी संकल्प अर्थात् मानस कर्म शान्त हो गये हैं, जो निखिल कामों से रहित है, जो सभी
प्रकार के क्रोध से शून्य है, ऐसे चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हैं