Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 109
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 109 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 109
संस्कृत श्लोक
अहार्यममृतं सत्यं चिदात्मानमुपास्महे ।
शब्दरूपरसस्पर्शगन्धैराभासमागतम् ।। १०९
हिन्दी अर्थ
जिसके द्वारा शब्द, रूप, रस, स्पर्श और
गन्ध - ये पाँच विषय अभिव्यक्ति प्राप्त करते हैं अर्थात् इनका अनुभव जिस साक्षीरूप चैतन्य से होता
है, ऐसे, परमार्थतः उन विषयों से रहित, अतएव शान्त उस चिदात्मस्वरूप को मैं प्राप्त हुआ हू