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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 111

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 111 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 111

संस्कृत श्लोक

न रञ्जनं न चाकाशं चिदात्मानमुपागतः । महामहिम्ना सहितं रहितं सर्वभूतिभिः । कर्तृत्वे वाप्यकर्तारं चिदात्मानमुपागतः ।। १११

हिन्दी अर्थ

जो बड़ी-बड़ी विभूतियों से युक्त है और जो अद्वैत-दृष्टि से समस्त विभूतियों एवं महिमाओं से रहित है तथा जो मायाशबलित होकर जगत का कर्ता होते हुए भी यथार्थ में अकर्ता है, एेसे चिदाकार आत्मस्वरूप को मैं प्राप्त हुआ हू