Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
राजपुत्र महाबाहो विदिताखिलवेद्य हे ।
स्फुटं श्रृणु यथा पृष्टमयमेषां हि निश्चयः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो, हे राजकुमार, हे समस्त वेद्य पदार्थो के स्वरूप को
जाननेवाले रामभद्र, जो आपने प्रश्न पूछा है, उसका उत्तर स्पष्टरूप से आप सुनिए, उनका यही
निश्चय है