Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
स्फुरति ब्रह्मणि ब्रह्म नाहमस्मीतरात्मकः ।
घटो ब्रह्म पटो ब्रह्म ब्रह्माहमिदमाततम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, घट भी ब्रह्मरूप है, पट भी ब्रह्मरूप है, मैं भी ब्रह्मरूप हूँ, यह विस्तृत प्रपंच भी ब्रह्मस्वरूप
है, इसलिए मिथ्या राग, विराग आदि की यहाँ कल्पना ही क्या ?