Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

मनो बुद्धिरहंकारस्तन्मात्राणीन्द्रियाणि च । ब्रह्मैव सर्वं नानात्म सुखं दुःखं न विद्यते ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

मन, बुद्धि, अहंकार, तन्मात्रा, इन्द्रियाँ आदि सब ब्रह्मस्वरूप ही हैं, उससे भिन्न नहीं है, अतः सुख ओर दुःख का अस्तित्व ही नहीं हो सकता