Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अभावितं ब्रह्मतया ब्रह्माज्ञानमलं भवेत् ।
अभावितं हेमतया यथा हेम च मृद्भवेत् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान अत्यन्त विरुद्ध, असंभावित पदार्थ का निर्माण करता है, यह लोक मे प्रसिद्ध ही है, ऐसा
कहते हैं।
ब्रह्मस्वरूप से न पहचाना हुआ ब्रह्म उस प्रकार अज्ञानरूप हो जाता है, जिस प्रकार सुवर्णरूप से
न जाना हुआ सुवर्ण मृत्तिकारूप हो जाता है