Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
ज्ञातं ब्रह्मतया ब्रह्म ब्रह्मैव भवति क्षणात् ।
ज्ञातं हेमतया हेम हेमैव भवति क्षणात् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मस्वरूप से ज्ञात ब्रह्म, तत्क्षण ही उस प्रकार ब्रह्मस्वरूप हो जाता है, जिस प्रकार सुवर्णरूप से
ज्ञात सुवर्ण तत्क्षण में ही सुवर्णं हो जाता है