Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मात्मा सर्वशक्तिर्हि तद्यथा भावयत्यलम् ।
निर्हेतुकः स्वयं शक्त्या तत्तथाशु प्रपश्यति ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा समस्त शक्तियों से परिपूर्ण स्वयं ब्रह्म है, वह किसी तरह के प्रयोजन के बिना स्वयं जिस-
जिस स्वरूप से यानी जीव ओर जगद्रूप से या तात्त्विक ब्रह्मरूप से जैसी-जैसी भावना करता हे,
भावना के बल पर शीघ्र ही उस-उस स्वरूप से अपने-आपको देखता हे