Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
अपरिज्ञातमज्ञानामज्ञानमिति कथ्यते ।
परिज्ञातं भवेज्ज्ञानमज्ञानपरिनाशनम् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त स्वरूप से ज्ञात न हुआ ब्रह्म अज्ञानियों द्वारा अज्ञानशब्द से व्यवहृत होता है, ओर परिज्ञात
हुआ, अज्ञानका विनाशक ब्रह्म ही ज्ञानशब्द से कहा जाता हे