Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
यो मतः सर्व एकात्मा परं ब्रह्मेति निश्चयः ।
चिदात्मा ब्रह्म सत्सत्यमृतं ज्ञ इति नामभिः ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदात्मा, ब्रह्म, सत्, सत्य,
ऋत इत्यादि नामों से व्यापक, चेत्यशून्य, चैतन्मात्रस्वरूप ब्रह्मतत्त्व ही सर्वत्र कहा जाता है