Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
प्रोच्यते सर्वगं तत्त्वं चिन्मात्रं चेत्यवर्जितम् ।
आभासमात्रममलं सर्वभूतात्मबोधकम् ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयसंसर्गशून्य चैतन्यमात्रस्वरूप, निर्मल, समस्त भूतों के स्वरूप का अवबोधक, सर्वत्र स्थित, शान्त,
चिदुव्रह्म का ब्रह्मज्ञानी अनुभव करते हैं