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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यथा विहरति ज्ञातज्ञेयो जनकभूपतिः । आत्मज्ञानाभ्यासपरस्तथा विहर राघव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, जिस प्रकार राजा जनक जी विदिततत्त्व होकर भूमण्डल में विहार करते हैं, उसी प्रकार आप आत्मज्ञान के अभ्यास में निरत होकर विहार कीजिए