Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

निश्चयोऽयमभूत्तस्य कार्याकार्यविहारिणः । जाग्रतस्तिष्ठतो वापि तज्ज्ञानां तेन सत्यता ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जागते अथवा सोते तथा चलते या बैठते बाहर के व्यवहाररूप कार्य से तथा समाधिरूप अकार्य से विहार कर रहे उस राजा जनक का भी निश्चय मेरे अनुभव के अनुसार ही था । उक्त अभ्यास का ही फल आत्मज्ञान है और उक्त ज्ञान से अभिव्यक्त हुए स्वरूप की ही वास्तव मेँ सत्यता होती है, ऊपर-ऊपर के ज्ञान से अभिव्यक्त फल की नहीं