Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
निश्चयेन हरिर्येन विविधाचारकारिणा ।
योनिष्ववतरत्युर्व्यां तत्तज्ज्ञत्वमुदाहृतम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान नारायण, अपने विभिन्न-विभिन्न प्रकार के लीला चरण करने के जिस निश्चय के
कारण पृथ्वीपर योनि में यानी गर्भवास आदि क्लेशो मे अवतार लेकर भी दुःख आदि से सम्बद्ध नहीं
होते, वही निश्चय आत्मज्ञान का स्वरूप कहलाता हे