Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
निश्चयो यस्त्रिनेत्रस्य कान्तया सह तिष्ठतः ।
ब्रह्मणो वाप्यरागस्य स ते भवतु राघव ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, जगदम्बा पार्वती के साथ रहनेवाले त्रिनेत्र महादेवजी का या राग-वर्जित ब्रह्मा का जो भी
निश्चय है, वही आपको भी हो