Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 75
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
चन्द्रप्रत्ययसत्त्वात्म चिद्ब्रह्माहमनामयम् ।
भूमिष्ठनरदृष्टीनां लग्नानां खे निशाकरे ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में स्थित चन्द्रमा में लगे हुए भूमि में
अवस्थित पुरुषों के नेत्रां की जो आकाशस्थ (मध्यवर्ती आकाश-प्रदेश में स्थित) चित्-शक्ति है,
वही निर्मल चिदुव्रह्म हे