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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 91

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 91

संस्कृत श्लोक

सत्तासामान्यरूपेण या चित्सोऽहमलेपकः । सर्वासामनुभूतीनामादर्शो यो ह्यकृत्रिमः ।। ९१

हिन्दी अर्थ

निखिल अनुभववृत्तियों के भेदो का जो स्वाभाविक आदर्श अर्थात्‌ दर्पण है ओर जो मललेखा यानी अज्ञान पंक्तियों का अविषय है, वह महान चित्तत्त्व मैं हूँ