Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 90
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 90 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 90
संस्कृत श्लोक
हेम्नीव संस्थिता देहे चिद्ब्रह्मात्मास्मि सर्वगः ।
पदार्थौघस्य शैलादेर्बहिरन्तश्च सर्वदा ।। ९०
हिन्दी अर्थ
पर्वत आदि पदार्थ-समुदाय के बाहर एवं भीतर सर्वदा अनुगतरूप से सत्तावाली जो चिति है,
वही मैं निर्लिप्त आत्मा हूँ