Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 93
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 11, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 93
संस्कृत श्लोक
सर्वोपादेयसीमान्तं चिदात्मानमुपास्महे ।
सर्वावयवविश्रान्तं समस्तावयवातिगम् ।। ९३
हिन्दी अर्थ
जो संपूर्ण अवयवो में विश्रान्त एवं सम्पूर्ण अवयवो से परे हे तथा जिसका सदा-सर्वदा विकसित
स्वरूप है, ऐसे चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हैं