Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 117, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 117, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
इयं तु सर्वदृश्याढ्या राजन्सर्गपरंपरा ।
तस्मिन्नेव महादर्शे प्रतिबिम्बमुपागता ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजन्, यह सम्पूर्ण दृश्यों से भरी हुई सृष्टिपरम्परा उसी सदात्मस्वरूप
महान् दर्पण में प्रतिबिम्ब को प्राप्त हो गयी है (&)