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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 119, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 119, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

इदं रम्यमिदं नेति बीजं ते दुःखसंततेः । तस्मिन्साम्याग्निना दग्धे दुःखस्यावसरः कुतः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, यह अच्छा है ओर यह अच्छा नहीं है, इस प्रकार की भावना ही आपके दुःख की कारण है। जब वह भावना सर्वत्र समदृष्टिरूपी अग्नि से जल गयी, तब दुःख की प्राप्ति ही कहाँ ?