Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

न ममज्जुः क्वचिदपि संकटेषु महत्स्वपि । महदप्युपयातेषु कुलशलाः सरस्स्विव ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

इसीलिए बड़े-बड़े संकट भी उनके पास पहुँचे या सर्वातिशायी ऐश्वर्य को भी वे प्राप्त होवें, किसी भी दशा में वे-सरोवरों में हिमालय आदि कुलपर्वतों की नाई व्यग्र नहीं होते थे