Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
नोल्ललास विलासिन्या श्रिया परमकान्तया ।
परिपूर्णेन्दुलक्ष्म्येव जलराशी रघूद्वह ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुकुल शिरोमणे श्रीरामजी, जैसे पूर्णचन्द्र की कान्ति से समुद्र उल्लास को प्राप्त होता है,
(ज्वार भाटों से युक्त होकर चंचलता को प्राप्त होता है), वैसे इन तत्त्ववेत्ता पुरुषों का मन अत्यन्त
कमनीय लक्ष्मी और कामिनी से उल्लास को (चंचलता को) प्राप्त नहीं होता था। यहाँ समुद्र व्यतिरेक
दृष्टान्त है, यह जानना चाहिए