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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

न मम्लौ दुःखशोकेन ग्रीष्मेणेव वनस्थलम् । जहर्ष च न भोगौघैरवश्यायैरिवौषधीः ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्त्ववेत्ता का मन दुःख एवं शोक से, ग्रीष्मकाल में वनस्थल की नाई, मलीनता को (मुरझाहट को) प्राप्त नहीं हुआ और न भोगों के समूहों से, ओस से ओषधि की नाई, प्रसन्नता को ही प्राप्त हुआ