Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
ते हि केवलमव्यग्राः कुर्वन्तः काममञ्जरीः ।
इष्टानिष्टफलं राम नाभिलेषुर्न तत्यजुः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, वे तत्त्ववेत्ता महात्मा कर्तृत्वअभिमान से रहित होकर भोगरूपी मंजरियों का
अनुभव करते हुए भी इष्ट एवं अनिष्ट फल की न अभिलाषा करते थे ओर न उन्हें छोड ही देते थे,
यह आप निश्चय से जानिए