Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
महत्तामलमालम्ब्य त्यक्त्वेदमवहेलया ।
असक्तबुद्धिः सर्वत्र भव भव्य भवक्षयी ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कल्याणकारी श्रीरामजी, ब्रह्मरूपता का पर्याप्त अवलम्बन कर ओर संसार का अनादरपूर्वक
त्यागकर सर्वत्र अनासक्तबुद्धि होते हुए आप संसार का नाश करने वाले हो जाइए