Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
व्यपगतमदमोहो मानमात्सर्यमुक्त श्चिरतरमुदितात्मा शान्तशोकश्चिरेण ।
पुनरसुखमगच्छन्स्वच्छयैकान्तबुद्ध्या यदिह वदसि साधो तत्करिष्येऽविशङ्कं ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे साधो, मेरा मद ओर मोह निकल गया, मैं मान एवं मात्सर्य अर्थात् डाह से रहित हो चुका ।
अत्यन्त चिरकाल के बाद मेरी आत्मा आनन्दयुक्त हुई ओर दीर्घकाल में मेरा शोक-शान्त हुआ । अब
फिर मैं आत्मबन्धन रूप भ्रम को प्राप्त नहीं होऊँगा, अतः निश्चित बुद्धि से इस उपदिष्टार्थ के विषय में
जिस किसी दढता के साधन का या अन्य किसी राज्यपालनादि कर्तव्य-विशेष का आप उपदेश देंगे,
शंकारहित होकर मैं उसका अनुष्ठान करूँगा