Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तिरस्तं गता नूनं मिहिका शरदीव मे ।
संशान्ताखिलसंदेहः करिष्ये वचनं तव ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
शरत्काल में कुहरे की नाई
मेरी भ्रान्ति नष्ट हो गयी है । अब सम्पूर्णं सन्देहं से शान्त हुआ मैं आपके वचनो का पालन
करूँगा