Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
अहो न भगवन्नूनं सम्यग्जातमलक्षयः ।
त्वत्प्रसादात्प्रबुद्धोऽस्मि सूर्यसङ्गादिवाम्बुजम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्, आपकी कृपा से मेरे अज्ञानरूपी मलका भली प्रकार क्षय हो
गया है ओर मेँ सूर्य के सम्बन्ध से कमल की नाई प्रबुद्ध हुआ हूँ