Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
भ्रेमुः कुसुमपूर्णासु दोलान्दोलचलासु च ।
विचित्रवनलेखासु मेरुश्रृङ्गशिखासु च ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
फूलों से पूर्ण, झूले के आन्दोलनों से चंचल चित्र-विचित्र वनों की पंक्तियों में एवं मेरूपर्वतकी
चोटियों के ऊपर विहार करते थे