Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
चक्रुर्विजितशत्रूणि चामरच्छत्रवन्ति च ।
विचित्रार्थानि राज्यानि चित्राचारमयानि च ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनमें शत्रुओं को जीत लिया गया है, जो छत्र एवं चामर से युक्त हैं, जिनमें धर्म, अर्थ एवं कामरूप
त्रिविध पुरुषार्थों को देनेवाले त्रिविध वर्णाश्रम-धर्म एवं तदनुसारी आचार हैं, ऐसे राज्यों को भी वे
जीवन्मुक्त महात्मा करते थे