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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अनुजग्मुरिमान्सर्वान्नानाचारविचेष्टितान् । श्रुतिस्मृत्युदितारम्भामितिकर्तव्यतामिति ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

वे अनेक प्रकार के शिष्टाचारों से अनुष्ठित इन सभी धर्मो का स्वयं अनुष्ठान करते थे । इसी प्रकार श्रुति एवं स्मृति से बतलाई गई कर्तव्यतावाले सांग यज्ञ आदि का भी अनुष्ठान करते थे