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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

ईदृशीरमणीयेषु ललनाहास्यहारिषु । विहाराहाररम्येषु भोगाभोगेषु भूषिताः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

दृष्ट-अदृष्ट साधनसम्पत्तियों से रमणीय, स्त्रियों की हँसी के सदूश मनका अपहरण करनेवाले और विहार एवं आहार में सुन्दर भोगो के समूहों से वे भूषित थे