Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
विविशुश्चारुचूतासु मन्दारवलितासु च ।
अप्सरोगीतपूर्णासु नन्दनोद्यानभूमिषु ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
कमनीय आग्रवृक्षों से युक्त, मन्दार की मालाओं से परिवेष्टित, अप्सराओं के मनोहर गीतों से
परिपूर्ण नन्दनवन की उद्यानभूमियो में प्रवेश करके वे जीवन्मुक्त उपभोग करते थे