Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सचराचरभूतेषु विश्रान्ताखिलजन्तुषु ।
यज्ञक्रियाकलापेषु गार्हस्थ्येषु यथाक्रमम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
चराचर भूतो
से युक्त समस्त भुवनो में, निखिल प्राणियों के सुखों के साधन यज्ञादि क्रियाकलापों में एवं गृहकर्मों में
वे तत्त्ववित् यथाक्रम प्रविष्ट होते थे