Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तेरुर्हतगजेन्द्रासु भ्रान्तभूरिशिवासु च ।
भेरीभांकारभीमासु संग्रामार्णववीथिषु ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनमें अनेक बड़े-बड़े हाथी मारे गये हैं, अनेक श्रगाल (सियार) और श्रृगाली जिनमें परिभ्रमण
कर रहे हैं और जो नगारों के झंकारध्वनियों से भयंकर हैं, ऐसे संग्रामरूपी समुद्रों के मार्गों को भी वे
जीवन्मुक्त महात्मा पार कर चुके थे