Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 120, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 120, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अन्तः प्रत्याहृतिवशाच्चेत्यं चेन्न विभावितम् ।
मुक्त एवास्य संदेहो महासमतया तया ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
सातवीं भूमिका में सब दृश्यों का प्रत्यगात्मा मे ठीक-ठीक विलय हो जाने के कारण आत्यन्तिक
जीवन्मुक्तता है, यह कहते हैं।
हे राजन्, प्रसिद्ध सप्तम भूमिका के अवलम्बन से सब दृश्यों का प्रत्यगात्मा में विलयकर तुमने यदि
चेत्य की भावना न की तो निश्चय मुक्त ही हो जाओगे, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं