Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 120, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 120, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
नासौ सुखायते नासौ नाशकाले न दुःखदः ।
क्षीणवासनया बुद्ध्या यत्कर्मक्रियतेऽनघ ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ, वासनानिर्मुक्त बुद्धि से जो कर्म किया जाता है वह कर्म जले हुए बीज के सदृश
रहता है वह फिर अंकुर पैदा नहीं करता