Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 120, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 120, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
शशाङ्कशीतलः पूर्णो भाति भासेव भास्करः ।
क्रियमाणा कृता कर्मतूलश्रीर्देहशाल्मलेः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
देहरूपी सेमल के वृक्ष से की जा रही और की गयी कर्मरूपी रुई की राशि ज्ञानरूपी वायु से कम्पित
होकर न जाने उडकर कहाँ चली जाती है