Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 121, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 121, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
इदं ममाहमस्येति व्यवहारघनभ्रमम् ।
ये मोहात्परिसेवन्ते अधस्ताद्यान्त्यधः शठाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्ता रज्जु का विषयों के साथ बन्धन बतलाते हैं।
“ये पुत्र, कलत्र आदि मेरे हैं ओर मैं इन पुत्र, कलत्र आदि का हूँ” इस तरह के मोह से व्यवहाररूपी
दृढ़ भ्रम का जो मूर्ख सेवन करते हैं, वे नीचे से भी नीचे की ओर जाते हैं