Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 124, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तस्मात्पदार्थनिचयात्सह स्थावरजङ्गमात् ।
तृणादेर्देवकायान्तान्मा किंचित्तव रोचताम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे रामभद्र, तुच्छातितुच्छ तृण से लेकर उत्कृष्ट से भी उत्कृष्ट हिरण्यगर्भ-शरीर तक के जितने
स्थावर-जंगमरूप पदार्थ हैं उनमें से कोई भी आपको रुचिकर न हो