Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 124, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
पाणिपादमयो योऽयं देहो भोगाय वल्गति ।
भोगार्थमेतज्जीवस्य रूपं स्थूलमिहास्थितम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उन्हीं रूपों को दिखलाते हैं।
हाथ-पैरवाला जो यह शरीर भोग के लिए निरन्तर लालायित रहता है वही यहाँ भोगार्थ इस
जीव का स्थूलस्वरूप स्थित है