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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 126, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अभ्यासात्साधुशास्त्राणां करणात्पुण्यकर्मणाम् । जन्तोर्यथावदेवेयं वस्तुदृष्टिः प्रसीदति ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

चित्त के प्रसन्न होने पर व्युत्थानकाल में पूर्व की दो भूमिकाओं के धर्मो का अनुसरण भी अत्यन्त आवश्यक है, इसे दिखलाते हैं। अध्यात्म विषयक सत्‌- शास्त्रों के अभ्यास से तथा पुण्यकर्मो के निमित्त से जीव की यह आत्मदृष्टि यथार्थ प्रफुल्लित होती है